उर्दू बेदारी फोरम की ओर से शानदार मुशायरे का आयोजन

मुजफ्फरनगर।
रिपोर्ट : डॉ. ताहिर कमर

उर्दू बेदारी फोरम, मुजफ्फरनगर की ओर से “एक शाम शहीदों के नाम” से एक खूबसूरत मुशायरे का आयोजन रहमत नगर स्थित इक़रा पब्लिक स्कूल में किया गया।

इस शानदार मुशायरे की अध्यक्षता उस्ताद शायर डॉ. सदाक़त देवबंदी ने की, जबकि मंच संचालन का दायित्व डॉ. ताहिर कमर मीरांपुरी ने बखूबी निभाया। शमा रोशन मुख्य अतिथि एवं पूर्व इनकम टैक्स कमिश्नर रईस आज़म खान, अमीर-ए-आज़म एडवोकेट शहज़ाद अहमद और औसाफ अंसारी द्वारा की गई।

उर्दू बेदारी फोरम के अध्यक्ष मास्टर शहज़ाद अहमद और महासचिव हाजी औसाफ अंसारी ने सभी अतिथि शायरों का गुलपोशी कर स्वागत किया। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की कुर्बानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुफ्ती अब्दुल सत्तार क़ासमी की नात-ए-पाक से मुबारक शुरू हुए इस मुशायरे में शायरों का चुनिंदा कलाम पाठकों की नज़र है—

इश्क़ तुमसे जुनू की हद तक है
और हद ही कहाँ जुनून की है
— डॉ. तनवीर गौहर

तारिकियों के साये दिलों से हटाइए
लेकर चराग़-ए-इल्म-ओ-अदब आप आइए
— रईस अहमद मुज़फ्फरनगरी

जहाँ जहाँ भी गिरा है मेरे बदन का लहू
वहीं से शोर उठा है, ये है वतन का लहू
— अब्दुल हक़ सहर

मेहमाँ की तरह हैं ग़म-ओ-आलाम सादिक़
आते हैं अगर आएँ, परेशा न हुआ कर
— डॉ. सादिक़ देवबंदी

मेरे लहू के दाग़ थे जिनके दामन पर
आज वही आईना दिखाने बैठ गए
— डॉ. ताहिर कमर मीरांपुरी

दोस्ताने की बात करते हो
किस ज़माने की बात करते हो
— शमीम किरतपुरी

ज़िंदगी हो जाए रोशन, ख़ुद को इस क़ाबिल करो
आधी रोटी खाओ, लेकिन इल्म अब हासिल करो
— सलामत राही

अल्लाह ऐसे शहर में मेरा मकाँ न हो
जिस शहर की फ़िज़ाओं में उर्दू ज़बा न हो
— अल्ताफ़ मशअल

अच्छे-अच्छों को हमेशा को सुलाया उसने
ज़हर नफ़रत का मोहब्बत से पिलाया उसने
— अहमद मुज़फ्फरनगरी

सर पे मेरे जो उनका दामन है
महका-महका सा दिल का गुलशन है
— मुस्तफ़ा कमाल

आईने से नाज़ुक है, टूट भी तो सकता है
बाज़ तुम नहीं आते फिर भी दिल लगाने से
— सलीम जावेद

इनके अलावा डॉ. आस मोहम्मद अमीन, मुफ़्ती अब्दुल सत्तार क़ासमी, डॉ. अनस आतिफ, फ़ुरक़ान आदम, जुनैद अज़हर और सिकंदर देवरियावी ने भी अपना कलाम पेश किया।

इस अवसर पर मोहम्मद इरशाद, शाहवेज़ अंसारी, डॉ. रियाज़ अली, डॉ. फ़र्रुख़ हसन, हाजी आबिद अली, रईसुद्दीन राणा, मोहम्मद नदीम, मोहम्मद आसिफ़, हाजी अबुल हसन, अली नवाज़, ज़मीर हसन, कामिल अली, इंजीनियर मोहम्मद फ़ुरक़ान, इंजीनियर असद पाशा, और क़ारी फ़ारूक़ आदि प्रमुख व्यक्तियों ने विशेष रूप से भाग लिया।

अंत में फोरम के अध्यक्ष शहज़ाद अहमद ने सभी शायरों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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