प्रसिद्ध कवि और विद्वान कमिश्नर डॉ. पंकज के. सिंह ‘राहिब मैत्रेय’ के सम्मान में विशेष गोष्ठी का आयोजन
सूख कर कब का बिखर जाता तिरी फ़ुरक़त में
मेरी मिट्टी को तिरी याद ने नम रक्खा है
गाज़ियाबाद (डॉ. तहसीन समर): प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (कमिश्नर) डॉ. पंकज के. सिंह ‘राहिब मैत्रेय’ के सम्मान में एक विशेष साहित्यिक गोष्ठी (नशिस्त) का आयोजन वार्ड नंबर 64 के पार्षद इरशाद चौधरी के गरिमा गार्डन स्थित कार्यालय पर किया गया।
डॉ. पंकज के. सिंह ‘राहिब मैत्रेय’ ने अपनी अद्वितीय शैक्षणिक योग्यता और साहित्यिक सेवाओं के बल पर देशव्यापी स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वे न केवल एक कर्तव्यनिष्ठ लोक सेवक हैं, बल्कि एक उत्कृष्ट कवि, लेखक, विचारक और वरिष्ठ बुद्धिजीवी के रूप में भी जाने जाते हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में एम.ए. (अंतर्राष्ट्रीय मामले), एम.ए. (ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म), एलएल.बी., एलएल.एम. सहित पीएच.डी. की उच्च डिग्रियां शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, डॉ. पंकज के. सिंह अब तक 60 से अधिक मूल्यवान पुस्तकें और साहित्यिक व शोधपरक उत्कृष्ट रचनाएं प्रकाशित कर चुके हैं। वे उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी, पाली, प्राकृत और संस्कृत जैसी प्राचीन व आधुनिक भाषाओं पर समान अधिकार रखते हैं और इन भाषाओं के बड़े विद्वान माने जाते हैं।
उनकी कृतियों और शोध कार्य का दायरा अत्यंत व्यापक है। उन्होंने लोक प्रशासन (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन), अर्थव्यवस्था, सुशासन (गवर्नेंस) और इतिहास जैसे गंभीर विषयों पर गहन शोध कार्य किया है। इसके अलावा, देश की शिक्षा प्रणाली, सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्याओं और पर्यावरणीय चुनौतियों पर भी उनकी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। धर्म, दर्शन, आध्यात्मिकता और वैश्विक सभ्यताओं के विकासवादी सफर पर उनका गहरा अध्ययन नई पीढ़ी के सुधारकों और पाठकों के लिए एक अमूल्य धरोहर है।

हाजी इरशाद चौधरी की अध्यक्षता और प्रसिद्ध कवि फरीद अहमद फरीद के कुशल संचालन (निजामत) में यह महफिल बेहद सफल रही। मुशायरे में आसपास के जिन गणमान्य लोगों ने भाग लेकर कवियों को दाद और सराहना से नवाजा, उनमें चौधरी शमशाद (पूर्व जिला अध्यक्ष व पूर्व प्रत्याशी), डॉ. मुशीर प्रधान जी, शाहिद नंबरदार, नेताजी फैजुद्दीन, मोहम्मद अली जी, इमरान खुसर चरथावल, चौधरी इब्राहिम, चौधरी गुलशेर, मोहम्मद आजम आदि के नाम शामिल हैं।
मुशायरे में पढ़े गए कुछ चुनिंदा शेर पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं:
कैसे होते हैं मिरे यार चलो चलते हैं
देख आते हैं वफ़ादार चलो चलते हैं
(समर बग्रासवी)
भूल जाना आपका मेरे लिए मुश्किल नहीं
आप क्या समझे मेरे कहने में मेरा दिल नहीं
(कामिल इशरती)
सूख कर कब का बिखर जाता तिरी फ़ुरक़त में
मेरी मिट्टी को तिरी याद ने नम रक्खा है
(फरीद अहमद फरीद)
कोई ये चाहता है दस्तरस में कुल समंदर हो
कोई इक बूँद की ख़ातिर समंदर छोड़ देता है
(तहसीन समर चरथावली)
मोहब्बत के निशाँ अपने मैं दिल से ख़ुद मिटा देता
अगर होता मिरे बस में तो मैं उनको भुला देता
(सूफी गुल्फाम)
भुला कर दिलों से ये नफ़रत की बातें
चलो आज छेड़ें मोहब्बत की बातें
(नईम हिंदुस्तानी)

